Gold Price Crash 2026: आज देश के बड़े शहरों में सोने के दाम रिकॉर्ड स्तर पर बने हुए हैं, हालांकि दोपहर 12 बजे के बाद कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। जयपुर और दिल्ली जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग 1,59,860 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं मुंबई और बेंगलुरु में इसकी कीमत करीब 1,57,220 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है। अगर 22 कैरेट सोने की बात करें तो इसका भाव लगभग 1,46,550 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है। यानी अब एक ग्राम सोना भी खरीदना जेब पर भारी पड़ रहा है। ज्वेलर्स के मुताबिक लोग दुकानों पर पहुंच तो रहे हैं, लेकिन ज्यादातर ग्राहक केवल रेट पूछकर वापस लौट रहे हैं। भारी कीमतों के चलते खरीदारी में पहले जैसी रफ्तार नहीं दिख रही है।
दोपहर 12 बजे के बाद क्यों आई राहत?
सुबह तक बाजार में सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं, लेकिन दोपहर के बाद भाव में कुछ कमी दर्ज की गई। इस गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। कई निवेशक और ग्राहक इसी मौके का इंतजार कर रहे थे कि कब बाजार थोड़ा नरम पड़े और वे खरीदारी कर सकें। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, फिर भी लगातार बढ़ते दामों के बीच यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, जिससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए आभूषण खरीदना मुश्किल हो गया था। अब जब बाजार में थोड़ी नरमी आई है तो उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।
आखिर क्यों बढ़े थे सोने के दाम?
सोने की कीमतों में आई भारी तेजी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों का बढ़ना है। वैश्विक स्तर पर सोना करीब 4,922 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था, जिससे घरेलू बाजार पर सीधा असर पड़ा। दूसरा महत्वपूर्ण कारण भारतीय रुपये की कमजोरी है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा सोना आयात करता है, इसलिए डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी ने कीमतों को और ऊपर धकेल दिया। इसके अलावा वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता जैसे कारकों के चलते निवेशकों ने सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख किया, जिससे मांग बढ़ी और दाम भी चढ़ गए। कमोडिटी बाजार में भी सोने ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। जब भी दुनिया में अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक शेयर बाजार से निकलकर सोने में निवेश करना सुरक्षित समझते हैं। यही वजह है कि मांग बढ़ते ही कीमतों में तेजी आ जाती है।
आम आदमी के लिए क्या है सही रणनीति?
ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आम व्यक्ति को क्या करना चाहिए। जिन लोगों ने पहले ही सोना खरीद रखा है, उनके लिए मौजूदा ऊंचे दाम फायदेमंद साबित हो सकते हैं। अगर वे चाहें तो अच्छे मुनाफे पर बिक्री कर सकते हैं। लेकिन जो लोग अभी सोना खरीदने की सोच रहे हैं, उन्हें थोड़ा धैर्य रखने की सलाह दी जा रही है। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। यदि तुरंत कोई जरूरी जरूरत नहीं है, तो कुछ समय तक कीमतों की दिशा को देखना बेहतर रहेगा। खासकर जिन परिवारों में शादी या कोई बड़ा कार्यक्रम आने वाला है, उन्हें पहले से बजट बनाकर और योजनाबद्ध तरीके से खरीदारी करनी चाहिए।
क्या निवेश के लिहाज से सोना अभी भी बेहतर विकल्प है?
सोना सदियों से सुरक्षित निवेश का प्रतीक रहा है। आर्थिक संकट के समय यह संपत्ति को सुरक्षित रखने का माध्यम माना जाता है। लेकिन वर्तमान ऊंची कीमतों पर छोटे निवेशकों के लिए बड़ी मात्रा में सोना खरीदना आसान नहीं है। ऐसे में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है। कुछ लोग भौतिक सोने के बजाय गोल्ड बॉन्ड या अन्य विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं, ताकि वे सीधे बाजार की ऊंची कीमतों का दबाव महसूस किए बिना निवेश कर सकें। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।
आगे क्या हो सकते हैं संकेत?
बाजार कभी स्थिर नहीं रहता। जिस तरह तेजी आई है, उसी तरह समय के साथ गिरावट भी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात, डॉलर की स्थिति और घरेलू मांग के आधार पर कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इसलिए जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय समझदारी से कदम उठाना बेहतर है। नियमित रूप से बाजार की जानकारी लेते रहें और विश्वसनीय स्रोतों से सलाह लेकर ही निवेश या खरीदारी का फैसला करें। अंत में यही कहा जा सकता है कि सोने के दाम फिलहाल ऊंचे स्तर पर हैं, लेकिन बाजार की चाल बदलते देर नहीं लगती। समझदारी, धैर्य और सही समय की पहचान ही इस समय की सबसे बड़ी कुंजी है।









