Holi School Holiday 2026: होली का नाम सुनते ही मन में रंग, उमंग और अपनों की हंसी गूंज उठती है। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है। वर्ष 2026 में होली का पर्व छात्रों के लिए खास बनने जा रहा है, क्योंकि कई राज्यों में स्कूलों में लगातार चार दिनों की छुट्टी घोषित की गई है। पढ़ाई के बीच यह छोटा सा विराम बच्चों के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं है। मार्च 2026 में पड़ने वाली होली के अवसर पर शिक्षा विभागों ने अवकाश का शेड्यूल जारी कर दिया है। होलिका दहन और धुलेंडी के साथ अतिरिक्त अवकाश जोड़कर कुल चार दिन तक स्कूल बंद रहने की संभावना है। इससे बच्चों को परिवार के साथ त्योहार मनाने का भरपूर समय मिलेगा और अभिभावकों को भी राहत की सांस मिलेगी।
होली 2026 की छुट्टियां: क्या है पूरा कार्यक्रम?
होली का पर्व परंपरागत रूप से दो मुख्य दिनों में मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन होता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। अगले दिन रंगों वाली होली या धुलेंडी खेली जाती है। वर्ष 2026 में इन दोनों दिनों को मिलाकर कई राज्यों ने अतिरिक्त अवकाश भी जोड़ा है, जिससे कुल चार दिन का ब्रेक मिल रहा है। राज्यों के शिक्षा विभाग हर साल अपने-अपने वार्षिक शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार छुट्टियों की घोषणा करते हैं। इस बार भी उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मार्च के पहले सप्ताह में स्कूल बंद रहने की सूचना है। कुछ स्थानों पर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अवकाश की तिथियों में हल्का बदलाव संभव है। यह अवकाश किसी नई योजना का हिस्सा नहीं है, बल्कि वार्षिक सरकारी छुट्टियों की सूची में शामिल नियमित त्योहार अवकाश है। फिर भी लगातार चार दिनों का अवकाश छात्रों के लिए विशेष उत्साह लेकर आया है।
छुट्टी का उद्देश्य और शिक्षा विभाग की भूमिका
त्योहारों पर अवकाश देना भारतीय शिक्षा व्यवस्था की पुरानी परंपरा रही है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य सरकारें अपने क्षेत्रीय त्योहारों और राष्ट्रीय पर्वों को ध्यान में रखते हुए छुट्टियों का निर्धारण करती हैं। होली जैसे बड़े पर्व पर अवकाश देना छात्रों की सांस्कृतिक भागीदारी और पारिवारिक मूल्यों को सशक्त बनाने का माध्यम है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को यह भी निर्देश दिए हैं कि अवकाश से पहले परिसर की साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और अवकाश के बाद दोबारा स्वच्छता की जांच की जाए। रंगों के कारण स्कूल भवनों और फर्नीचर को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना भी आवश्यक है। साथ ही छात्रों को अत्यधिक होमवर्क न देने की सलाह दी गई है, ताकि वे त्योहार का आनंद बिना तनाव के ले सकें। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह छोटा ब्रेक मानसिक रूप से तरोताजा होने का अवसर बन सकता है।
निजी और सरकारी स्कूलों में क्या रहेगा अंतर?
सरकारी स्कूलों में घोषित अवकाश शिक्षा विभाग के आदेशों के अनुसार लागू होंगे। वहीं निजी विद्यालयों को कुछ हद तक स्वतंत्रता होती है कि वे अपने अनुसार छुट्टियों में बदलाव कर सकें। हालांकि अधिकतर निजी स्कूल भी सरकारी कैलेंडर का ही पालन करते हैं। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के स्कूल से आधिकारिक सूचना अवश्य प्राप्त करें। कई बार स्थानीय प्रशासनिक कारणों या रविवार जैसे साप्ताहिक अवकाश के कारण छुट्टियों की अवधि बढ़ भी सकती है।
होली के बाद कब खुलेंगे स्कूल?
अवकाश की अवधि समाप्त होने के बाद अधिकतर राज्यों में 6 या 7 मार्च से कक्षाएं पुनः प्रारंभ होने की संभावना है। यदि बीच में सप्ताहांत पड़ता है तो कुछ स्थानों पर स्कूल 8 या 9 मार्च से खुल सकते हैं। स्कूल प्रबंधन द्वारा नोटिस बोर्ड और ऑनलाइन पोर्टल पर सूचना जारी की जाएगी। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे छुट्टियों के दौरान दिए गए कार्यों को समय पर पूरा करें। कुछ स्कूल ऑनलाइन माध्यम से पुनरावृत्ति कक्षाएं भी आयोजित कर सकते हैं, लेकिन मुख्य उद्देश्य बच्चों को आराम और पारिवारिक समय देना है।
छात्रों के लिए होली मनाने की उपयोगी सलाह
त्योहार का आनंद तभी सार्थक है जब वह सुरक्षित और स्वस्थ तरीके से मनाया जाए। बच्चों को रासायनिक रंगों के बजाय प्राकृतिक या हर्बल रंगों का प्रयोग करना चाहिए। पानी की बर्बादी से बचना भी आज के समय की आवश्यकता है, इसलिए सूखी होली खेलना बेहतर विकल्प हो सकता है। अभिभावकों को चाहिए कि छोटे बच्चों पर नजर रखें और उन्हें भीड़भाड़ या सड़कों पर अकेले न जाने दें। त्वचा और बालों की सुरक्षा के लिए पहले से तेल लगाने की आदत अपनाएं। अधिक मिठाइयों के सेवन से बचें और संतुलित आहार लें। होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है। घर में गुझिया, दही भल्ले और पारंपरिक व्यंजन बनाकर परिवार के साथ समय बिताना इस पर्व की असली आत्मा है।
क्यों खास है यह चार दिन का अवकाश?
परीक्षाओं के दबाव और लगातार पढ़ाई के बीच मिला यह चार दिन का विराम छात्रों को नई ऊर्जा देगा। मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ऐसे ब्रेक अत्यंत आवश्यक होते हैं। त्योहार बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और उनमें सामाजिक समरसता की भावना विकसित करते हैं। कोविड काल के बाद शिक्षा व्यवस्था ने संतुलन बनाने की कोशिश की है, ताकि पढ़ाई और त्योहार दोनों का महत्व बना रहे। यही कारण है कि अवकाश की योजना सोच-समझकर बनाई जाती है।
निष्कर्ष
होली 2026 छात्रों के लिए केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि चार दिनों की खुशियों का अवसर लेकर आ रही है। यह समय है परिवार के साथ हंसी-खुशी बिताने का, पुराने मनमुटाव भुलाने का और नई शुरुआत करने का। पढ़ाई अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन त्योहार जीवन में रंग भरते हैं और हमें इंसान बनाए रखते हैं। अंत में, सभी छात्रों और अभिभावकों को सलाह है कि अपने क्षेत्र के शिक्षा विभाग या स्कूल प्रशासन से आधिकारिक छुट्टी की पुष्टि अवश्य करें, क्योंकि तिथियों में स्थानीय स्तर पर परिवर्तन संभव है। सुरक्षित और आनंदमय होली मनाएं, और छुट्टियों के बाद नई ऊर्जा के साथ पढ़ाई में जुट जाएं।









