IMD High Alert: साल 2026 की शुरुआत के साथ ही मौसम ने ऐसा करवट ली है कि देशभर में हलचल मच गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ताजा पूर्वानुमान जारी करते हुए 21 राज्यों में हाई अलर्ट घोषित किया है। बंगाल की खाड़ी से उठा शक्तिशाली चक्रवात ‘मोंथा’ और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मिलकर ऐसा असर दिखा रहे हैं, जिसका प्रभाव पहाड़ से लेकर मैदान और तट तक साफ दिखाई दे रहा है। अगले 24 से 72 घंटों के दौरान भारी वर्षा, तेज हवाएं, ओलावृष्टि और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। अचानक बदले इस मौसम ने तापमान में गिरावट ला दी है और आम जनजीवन पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और तेज हवाओं का खतरा
उत्तर भारत के हिमालयी क्षेत्र इस समय मौसम के सबसे अधिक प्रभाव में हैं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में लगातार बर्फबारी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सर्द हवाएं चल सकती हैं। ऊंचे दर्रों और पहाड़ी सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है। उत्तराखंड के कई जिलों में भी भारी वर्षा और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की गई है। बर्फ से ढकी चोटियां और जमा देने वाली हवाएं न सिर्फ पर्यटन गतिविधियों को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी चुनौतियां खड़ी कर रही हैं।
मैदानी इलाकों में शीतलहर और तापमान में गिरावट
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी क्षेत्रों में महसूस किया जा रहा है। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में ठंड दोबारा तेज हो गई है। न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है। सुबह और रात के समय ठिठुरन बढ़ गई है, जिससे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की संभावना
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ मध्यम वर्षा और कुछ स्थानों पर ओले गिरने की आशंका जताई है। अचानक हुई इस बारिश से शहरों में यातायात प्रभावित हो सकता है। सड़कों पर फिसलन और जलभराव की स्थिति बन सकती है। प्रशासन ने लोगों को सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में घने कोहरे का अलर्ट
उत्तर प्रदेश और बिहार के मैदानी इलाकों में सुबह और देर रात घना कोहरा छाने की संभावना है। दृश्यता कम होने से सड़क और रेल यातायात पर असर पड़ सकता है। हवाई उड़ानों के संचालन में भी देरी हो सकती है। वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतने और हेडलाइट्स का सही उपयोग करने की सलाह दी गई है। मौसम के इस बदलते स्वरूप ने दैनिक जीवन की रफ्तार को धीमा कर दिया है।
दक्षिण भारत में ‘मोंथा’ तूफान का प्रभाव
बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव अब चक्रवात ‘मोंथा’ का रूप ले चुका है। इसका सबसे अधिक असर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु के कई जिलों में अत्यंत भारी वर्षा को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें मछुआरों और तटीय निवासियों के लिए खतरा बन सकती हैं। प्रशासन ने एहतियातन मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है और संवेदनशील क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भी तेज बारिश और आंधी का अनुमान है। निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
किसानों के लिए बढ़ी चिंता
इस असमय बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय रबी की फसलें जैसे गेहूं, चना और सरसों पकने की अवस्था में हैं। ऐसे में ओले और तेज वर्षा से फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ताकि पानी जमा न हो। अभी कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव टाल दें। कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर ढककर रखें ताकि बारिश से बचाव हो सके। यदि ओलावृष्टि से फसल को नुकसान होता है तो किसान तुरंत स्थानीय कृषि विभाग को सूचना दें ताकि उचित सहायता मिल सके। सरकार की ओर से मुआवजे की योजनाएं भी सक्रिय की जा सकती हैं।
अगले तीन दिनों तक सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग का अनुमान है कि ‘मोंथा’ चक्रवात और पश्चिमी विक्षोभ का संयुक्त प्रभाव अगले तीन दिनों तक बना रह सकता है। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और अफवाहों से बचें। प्राकृतिक परिस्थितियों पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन सावधानी और तैयारी से हम नुकसान को कम जरूर कर सकते हैं। घर से निकलते समय मौसम की जानकारी अवश्य लें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा की योजना बना रहे लोग फिलहाल इसे टाल दें। तटीय इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। मौसम का यह बदला हुआ रूप हमें एक बार फिर याद दिलाता है कि प्रकृति की शक्ति असीमित है। ऐसे समय में धैर्य, अनुशासन और सतर्कता ही सबसे बड़ा सहारा है। आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक सावधानी ही सुरक्षा है।









