Teacher TET New Update 2026: शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। यह परीक्षा वर्षों से शिक्षकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता को परखने का माध्यम रही है, लेकिन हालिया न्यायिक निर्देशों के बाद इसकी अनिवार्यता और अधिक स्पष्ट हो गई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि टीईटी केवल एक औपचारिक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण मानदंड है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षक का प्रशिक्षित और दक्ष होना अनिवार्य है, और इसी उद्देश्य से टीईटी को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत लागू किया गया था। लंबे समय से कई ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं की है। अब अदालत के निर्देशों के बाद इन शिक्षकों को निर्धारित अवधि के भीतर परीक्षा पास करनी होगी। इस निर्णय ने लाखों शिक्षकों के बीच नई हलचल पैदा कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश: योग्यता से समझौता नहीं
अदालत ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि जब बात बच्चों के भविष्य की हो, तो शिक्षकों की योग्यता पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं हो सकता। टीईटी का मकसद केवल प्रमाणपत्र देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षक बाल मनोविज्ञान, शिक्षण पद्धति और विषय ज्ञान में न्यूनतम दक्षता रखते हों। पहले यह माना जाता था कि टीईटी की अनिवार्यता केवल नई नियुक्तियों पर लागू होती है, लेकिन अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि सेवारत शिक्षकों के लिए भी यह शर्त लागू होगी। यदि कोई शिक्षक कई वर्षों से सेवा में है लेकिन टीईटी उत्तीर्ण नहीं है, तो उसे अदालत द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर परीक्षा पास करनी होगी। अन्यथा उसकी सेवा और पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार की स्थिति: सामूहिक छूट संभव नहीं
कई शिक्षक संगठनों ने मांग उठाई थी कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी से पूर्ण छूट दी जाए। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा करना कानून की भावना के विरुद्ध होगा। संसद में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया गया है और इसे समाप्त करने या व्यापक छूट देने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सोशल मीडिया पर यह अफवाह भी फैली थी कि सरकार टीईटी को समाप्त करने पर विचार कर रही है, लेकिन आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई योजना नहीं है। शिक्षा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीईटी जैसी परीक्षा को हटा दिया गया तो शिक्षा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सरकार का रुख स्पष्ट और सख्त है।
तमिलनाडु सरकार का विशेष टीईटी आयोजन
अदालत के आदेशों का पालन करते हुए तमिलनाडु सरकार ने सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस विशेष परीक्षा में उत्तीर्णांक में कुछ राहत दी गई है। सामान्य वर्ग के लिए 60 प्रतिशत, ओबीसी वर्ग के लिए 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। यह व्यवस्था केवल वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों के लिए लागू होगी। पिछले वर्षों में नियमित टीईटी में आरक्षित वर्गों के लिए उत्तीर्णांक अधिक था, लेकिन इस विशेष परीक्षा में कुछ लचीलापन दिखाया गया है। परीक्षा की अवधि तीन घंटे निर्धारित की गई है और इसका ढांचा नियमित टीईटी जैसा ही रहेगा। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा नई भर्ती के लिए लागू नहीं होगी।
दो वर्ष की समयसीमा: अवसर और चुनौती दोनों
अदालत ने सेवारत शिक्षकों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए दो वर्ष का समय दिया है। सुनने में यह अवधि पर्याप्त प्रतीत होती है, लेकिन व्यवहारिक दृष्टि से यह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। जो शिक्षक पहले से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, उन्हें अपनी दैनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ परीक्षा की तैयारी भी करनी होगी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के सामने अतिरिक्त कठिनाइयाँ हो सकती हैं, जैसे अध्ययन सामग्री की उपलब्धता, प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी और समय प्रबंधन की समस्या। कुछ राज्य सरकारें प्रशिक्षण कार्यक्रम और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की योजना बना रही हैं, लेकिन यह सुविधा हर राज्य में समान रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए शिक्षकों को अपने राज्य के शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से नियमित जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
अन्य राज्यों पर संभावित प्रभाव
तमिलनाडु का यह निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में भी बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने टीईटी पास नहीं की है। आने वाले समय में इन राज्यों में भी विशेष टीईटी या उत्तीर्णांक में राहत जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है, हालांकि अभी तक ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह भी महत्वपूर्ण है कि विशेष टीईटी और नियमित टीईटी प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। यदि किसी राज्य में विशेष परीक्षा आयोजित होती है, तो उसकी मान्यता और उपयोगिता राज्य की नीति पर निर्भर करेगी। इसलिए हर शिक्षक को अपने राज्य की अधिसूचनाओं पर नजर बनाए रखना आवश्यक है।
शिक्षा की गुणवत्ता की दिशा में निर्णायक कदम
टीईटी को लेकर हालिया घटनाक्रम यह संकेत देता है कि सरकार और न्यायपालिका दोनों शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। शिक्षक समाज का आधार होते हैं और उनकी दक्षता सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी होती है। यह बदलाव उन शिक्षकों के लिए चुनौती जरूर है जिन्होंने अभी तक परीक्षा पास नहीं की है, लेकिन इसे अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। बेहतर तैयारी और प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षक अपनी पेशेवर योग्यता को और मजबूत बना सकते हैं। अंततः यह स्पष्ट है कि टीईटी अब केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली की मजबूती का आधार बन चुकी है। आने वाले समय में इस परीक्षा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है, और शिक्षकों को बदलते नियमों के अनुरूप स्वयं को तैयार रखना होगा।
अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचना के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। टीईटी से संबंधित नियम, उत्तीर्णांक और समयसीमा अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकती है। सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए संबंधित राज्य शिक्षा विभाग की आधिकारिक अधिसूचना अवश्य देखें।









